काठमाडौँ । १० वैशाख २०८३
नेपाल प्रज्ञा–प्रतिष्ठानले भाषा, साहित्य, संस्कृति, दर्शन र सामाजिक शास्त्रका विभिन्न विधामा विशिष्ट योगदान पुर्याउने स्रष्टाहरूका लागि 'प्रज्ञा पुरस्कार–२०८२' को घोषणा गरेको छ। प्रतिष्ठानका सदस्य सचिव डा. धनप्रसाद सुवेदीद्वारा आज जारी प्रेस विज्ञप्तिअनुसार यस वर्षदेखि प्रादेशिक स्रष्टाहरूलाई प्रोत्साहन गर्ने उद्देश्यले पहिलोपटक 'प्रज्ञा प्रादेशिक पुरस्कार' समेत प्रारम्भ गरिएको छ।
प्रज्ञा पुरस्कार–२०८२ (विधागत विवरण)
प्रतिष्ठानले जनही रु. १,००,०००।– (एक लाख) राशि र सम्मानपत्रसहित विभिन्न १२ विधामा निम्न स्रष्टाहरूलाई पुरस्कृत गर्ने निर्णय गरेको छ:
| पुरस्कारको नाम | पुरस्कृत स्रष्टा |
|---|---|
| प्रज्ञा समालोचना पुरस्कार | प्रा.डा. अभि सुवेदी |
| प्रज्ञा भाषा पुरस्कार | प्रा. मुकुन्दशरण उपाध्याय |
| प्रज्ञा सामाजिक शास्त्र पुरस्कार | डा. डम्बर चेम्जोङ |
| प्रज्ञा पद्य साहित्य पुरस्कार | शैलेन्द्र साकार |
| प्रज्ञा संस्कृति पुरस्कार | प्रा.डा. सोमप्रसाद खतिवडा |
| प्रज्ञा बालसाहित्य पुरस्कार | सुशीला प्रधानाङ्ग |
| प्रज्ञा गद्य साहित्य पुरस्कार | आहुति |
| प्रज्ञा दर्शन पुरस्कार | ईश्वरचन्द्र ज्ञवाली |
| प्रज्ञा अनुवाद पुरस्कार | डा. सर्वोत्तम श्रेष्ठ |
| प्रज्ञा अन्तर्देशीय पुरस्कार | नरेश काङमाङ राई (बेलायत) |
| प्रज्ञा मातृभाषा पुरस्कार (हिमाली/पहाडी) | बुद्ध योञ्जन |
| प्रज्ञा मातृभाषा पुरस्कार (मधेश/तराई) | अमरेन्द्रकुमार यादव |
प्रज्ञा प्रादेशिक पुरस्कार (सातै प्रदेश)
यस वर्षबाट सुरु गरिएको प्रादेशिक पुरस्कारको राशि जनही रु. ५०,०००।– (पचास हजार) रहेको छ। पुरस्कृत हुने स्रष्टाहरू:
- कोसी प्रदेश: मलिसा याक्थुम्बा लिम्बु (महेन्द्रकुमार नेम्वाङ)
- मधेस प्रदेश: मुना चौधरी
- बागमती प्रदेश: शान्ति प्रिय बन्दना
- गण्डकी प्रदेश: अनिल श्रेष्ठ
- लुम्बिनी प्रदेश: क्षितिज मगर
- कर्णाली प्रदेश: रमानन्द आचार्य
- सुदूरपश्चिम प्रदेश: कर्ण दयाल ‘सोडारी’
घोषित प्रज्ञा पुरस्कारहरू आगामी २०८३ साल वैशाख १७ गते बिहीबारका दिन वितरण गरिनेछ। उक्त सम्मान अर्पण समारोह काठमाडौँको कमलादीस्थित प्रज्ञा–प्रतिष्ठानकै सिद्धिचरण सभाकक्षमा विशेष समारोहका बीच आयोजना गरिनेछ।
"नेपाली भाषा, कला र वाङ्मयको संरक्षण तथा संवर्द्धनमा क्रियाशील प्रज्ञा–प्रतिष्ठानले हरेक वर्ष राष्ट्रराष्ट्रिय तथा अन्तर्राष्ट्रिय स्तरमा रहेका नेपाली स्रष्टाहरूलाई सम्मानित गर्दै पठन संस्कृतिको विकासमा टेवा पुऱ्याउँदै आएको छ।"
स्रोत: नेपाल प्रज्ञा–प्रतिष्ठान, केन्द्रीय कार्यालय